(N/A) स्तनधारियों में सांद्र मूत्र का निर्माण मुख्य रूप से $Loop$ $of$ $Henle$ (हेनले का लूप) और $Vasa$ $Recta$ (वासा रेक्टा) द्वारा होने वाली $Counter-Current$ $Mechanism$ (प्रतिधारा क्रियाविधि) के माध्यम से होता है।
$1$. $Counter-Current$ $Multiplier$: हेनले का लूप वृक्क के मज्जा (medulla) में सांद्रता प्रवणता (gradient) उत्पन्न करता है। अवरोही भुजा जल के लिए पारगम्य है लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अपारगम्य है,जबकि आरोही भुजा जल के लिए अपारगम्य है लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स ($Na^{+}$,$Cl^{-}$) के सक्रिय परिवहन की अनुमति देती है। यह मज्जा के अंतरालीय स्थान को हाइपरऑस्मोलर बनाता है।
$2$. $Counter-Current$ $Exchanger$: $Vasa$ $Recta$ (हेनले के लूप के चारों ओर केशिका नेटवर्क) विलेय को बहने से रोककर इस प्रवणता को बनाए रखता है।
$3$. $Hormonal$ $Regulation$: $Antidiuretic$ $Hormone$ ($ADH$ या $Vasopressin$) के प्रभाव में,संग्रह नलिका (collecting duct) जल के लिए पारगम्य हो जाती है। जैसे-जैसे निस्यंद हाइपरऑस्मोलर मज्जा से गुजरता है,परासरण (osmosis) द्वारा जल रक्त में पुनः अवशोषित हो जाता है,जिसके परिणामस्वरूप सांद्र मूत्र का उत्सर्जन होता है।